गुड़ी पड़वा पर CM मोहन यादव बोले—नववर्ष से सृष्टि में नई ऊर्जा, कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम में दिया संबोधन; कहा —सरकार सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों पर काम कर रही, ब्रह्म ध्वज की भी स्थापना की

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गुड़ी पड़वा के अवसर पर भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के तहत हुए “कोटि सूर्य उपासना” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय नववर्ष और विक्रम संवत् 2083 की शुरुआत को विशेष महत्व के साथ रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक कैलेंडर बदलने का दिन नहीं, बल्कि सृष्टि के आरंभ की स्मृति और भारतीय संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक है। उनके अनुसार, गुड़ी पड़वा के साथ ही वातावरण में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है, मानो पूरी सृष्टि में मिठास घुल गई हो।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सम्राट विक्रमादित्य के योगदान को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य ने न केवल शत्रुओं को परास्त किया, बल्कि समाज में व्याप्त अव्यवस्था को खत्म कर न्याय और संतुलन पर आधारित शासन की नींव रखी। उनकी शासन शैली ऐसी थी, जिसमें प्रजा का कल्याण सर्वोपरि था—चाहे कर्जमुक्ति हो या सामाजिक समरसता की स्थापना। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि विक्रम संवत् केवल समय गणना नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा है जो पराक्रम, न्याय और जनहित की भावना से जुड़ी है, और आज यह 2083वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ब्रह्मध्वज की स्थापना भी की और इसे एकता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी सामूहिकता और “जियो और जीने दो” की सोच है। इसी विचारधारा ने लोकतंत्र को हमारी पहचान बनाया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सम्राट विक्रमादित्य के समय से ही ऐसी शासन पद्धति की नींव पड़ी, जिसमें जनता केंद्र में रही, और आज भी सरकारें उसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।

डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा कि उनकी सरकार विक्रमादित्य के आदर्शों को आधुनिक संदर्भ में लागू करने की दिशा में काम कर रही है। उज्जैन में विक्रमादित्य शोधपीठ की स्थापना और वैदिक घड़ी जैसे प्रयास इसी सोच का हिस्सा हैं, जिनके जरिए सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि, चेटीचंड, नवरेह और अन्य पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए इसे सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का अवसर बताया।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला, जहां सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कलाकारों का सम्मान किया और आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना की। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौजूदगी ने आयोजन को और भी खास बना दिया। कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम परंपरा, इतिहास और वर्तमान के संगम के रूप में सामने आया, जहां भारतीय नववर्ष के स्वागत के साथ-साथ सांस्कृतिक गौरव को भी प्रमुखता से सामने रखा गया।