पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया है। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित होती है और उसके हिस्से के पानी पर खतरा महसूस होता है, तो देश सैन्य कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत सिंधु नदी प्रणाली के पानी के प्रवाह को प्रभावित कर उसे रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पिछले एक वर्ष में इस विषय पर हुए सभी घटनाक्रमों की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है। इसके बावजूद उनका बयान पाकिस्तान की ओर से कड़ा संदेश माना जा रहा है।
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। भारत का स्पष्ट रुख है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को दोबारा लागू करने पर विचार नहीं किया जाएगा।
इस बीच पाकिस्तान के कई हिस्सों में गंभीर जल संकट देखने को मिल रहा है। सिंध और बलूचिस्तान सहित कई क्षेत्रों में नहरों का जलस्तर तेजी से गिरा है। विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं में पानी की भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे खेती, पेयजल आपूर्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल बंटवारे का ढांचा तय किया गया था। दशकों तक यह संधि दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण आधार रही, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संधि लंबे समय तक स्थगित रहती है तो पाकिस्तान की कृषि, जलविद्युत उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ सकता है। देश की अधिकांश सिंचाई व्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है, इसलिए पानी की कमी का सीधा प्रभाव खाद्य उत्पादन, बिजली आपूर्ति और करोड़ों लोगों की आजीविका पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।