भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देशभर में चलाए गए एक बड़े ऑपरेशन के दौरान एक ऐसे संदिग्ध नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क के माध्यम से तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) नाम से एक नए संगठन को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही थी। इस मामले में कई राज्यों से संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ के आधार पर नए खुलासे सामने आ रहे हैं।
जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित कई राज्यों में फैला हुआ था। अलग-अलग मॉड्यूल्स को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कुछ सदस्यों को संवेदनशील सैन्य और सरकारी प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाने का काम सौंपा गया था, जबकि अन्य लोगों को स्थानीय स्तर पर नए सदस्यों की भर्ती और लॉजिस्टिक सपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। एजेंसियां अब इन मॉड्यूल्स के बीच आपसी संपर्क और फंडिंग के स्रोतों की भी जांच कर रही हैं।
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती दौर में TTH को केवल एक प्रचार अभियान का हिस्सा माना जा रहा था, लेकिन हालिया जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि इसे एक संगठित नेटवर्क के रूप में तैयार किया जा रहा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरी योजना के पीछे पाकिस्तान स्थित तत्वों और विदेश में बैठे कुछ संदिग्ध संचालकों की भूमिका हो सकती है। खुफिया एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि संगठन को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जोड़कर किस तरह का अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्रचार के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाई जा रही थी। कथित तौर पर वैचारिक प्रचार के साथ-साथ आर्थिक लालच देकर नए लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न समुदायों के युवाओं को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई गई ताकि संगठन को एक स्थानीय भारतीय समूह के रूप में पेश किया जा सके और उसके विदेशी संबंधों पर पर्दा डाला जा सके।
एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क केवल संभावित आतंकी गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि हथियारों की सप्लाई, नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली दस्तावेज तैयार करने, फर्जी मुद्रा के कारोबार और अलग-अलग राज्यों में नए मॉड्यूल खड़े करने जैसी योजनाओं पर भी काम कर रहा था। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बहुआयामी और गंभीर खतरे के रूप में देख रही हैं और इससे जुड़े हर लिंक की गहन जांच की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों ने कई संदिग्धों को गिरफ्तार कर नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों को ध्वस्त करने का दावा किया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जांच जारी है और देशभर में संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। एजेंसियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी ताकि इस तरह के नेटवर्क को दोबारा सक्रिय होने से रोका जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाए रखा जा सके।