बेंगलुरु में मंगलवार शाम मेट्रो की पर्पल लाइन पर आई तकनीकी खराबी ने हजारों यात्रियों की रफ्तार थाम दी। दफ्तरों से घर लौटने के व्यस्त समय में अचानक सेवाएं प्रभावित होने से कई स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। कुछ समय के लिए ट्रेन संचालन पूरी तरह बाधित रहा, जिससे पूरे शहर की यातायात व्यवस्था पर भी असर देखने को मिला।
मेट्रो सेवा रुकने के बाद कैब और ऑटो की मांग में अचानक जबरदस्त उछाल आ गया। कई यात्रियों को घंटों तक कोई वाहन नहीं मिला, जबकि कुछ इलाकों में किराया भी सामान्य से अधिक वसूला जाने लगा। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग किसी भी तरह घर पहुंचने की कोशिश करते नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई यात्री ट्रकों, लॉरियों और अन्य मालवाहक वाहनों में लिफ्ट लेकर सफर करते दिखाई दिए, जिसने शहर की परिवहन व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी।
इस घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की तैयारियों और प्रबंधन पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि देश की आईटी राजधानी कहलाने वाले शहर में बार-बार इस तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आना चिंता का विषय है। लोगों ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बेहतर मेट्रो संचालन और आपातकालीन वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की मांग की।
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, शाम करीब 6:30 बजे कब्बन पार्क स्टेशन के पास एक ट्रेन में तकनीकी गड़बड़ी आने के कारण पर्पल लाइन की सेवाएं प्रभावित हुईं। यह लाइन व्हाइटफील्ड समेत शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आईटी क्षेत्रों को जोड़ती है, इसलिए हजारों दैनिक यात्री सीधे तौर पर प्रभावित हुए। शुरुआती जांच के बाद कुछ हिस्सों में सीमित सेवाएं बहाल की गईं, लेकिन कई स्टेशनों पर देर रात तक यात्रियों की भीड़ बनी रही।
तकनीकी टीमों ने पूरी रात मरम्मत का काम जारी रखा और बुधवार सुबह तक समस्या को पूरी तरह दूर करने का दावा किया। इसके बाद पर्पल लाइन पर नियमित संचालन शुरू कर दिया गया। हालांकि इस घटना ने तेजी से बढ़ते बेंगलुरु में सार्वजनिक परिवहन की क्षमता, तकनीकी रखरखाव और आपातकालीन प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की बढ़ती आबादी और रोजाना लाखों यात्रियों की निर्भरता को देखते हुए मेट्रो नेटवर्क की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। छोटी तकनीकी खराबी भी पीक आवर्स में बड़े संकट का रूप ले सकती है, जिससे न सिर्फ यात्रियों का समय प्रभावित होता है बल्कि सड़क यातायात पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में मजबूत बैकअप सिस्टम, त्वरित सूचना व्यवस्था और वैकल्पिक परिवहन योजनाओं की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।