SC का बड़ा निर्देश: रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की सुविधाओं में समानता के लिए बनेगी राष्ट्रीय नीति

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सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार को एक समान राष्ट्रीय नीति तैयार करने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। कोर्ट ने माना कि अलग-अलग राज्यों में रिटायर्ड जजों को मिलने वाली सुविधाओं में काफी अंतर है, जिसे दूर करने के लिए एक समान व्यवस्था जरूरी है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से इस मामले में एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि कमेटी को तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, ताकि रिटायर्ड न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर एक स्पष्ट और समान नीति बनाई जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि दो सप्ताह के अंदर इस कमेटी का गठन किया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कमेटी को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें रिटायर्ड जजों की जरूरतों और उन्हें उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर सुझाव दिए जाएं।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में एकरूपता नहीं है। कहीं सुविधाएं बेहतर हैं तो कहीं सीमित हैं। इस असमानता को खत्म करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की नीति की आवश्यकता महसूस की गई है।

यह मामला रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जजों के संगठन के अध्यक्ष जस्टिस वी.एस. दवे की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। याचिका में रिटायर्ड न्यायाधीशों को सुरक्षा, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के मुद्दे को उठाया गया है।

याचिका में यह मांग की गई है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को सम्मानजनक जीवन और आवश्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था बनाई जाए। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को एक व्यापक नीति तैयार करने की दिशा में काम करने के लिए कहा।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं में समानता लाना है। कोर्ट का मानना है कि देशभर में न्यायिक अधिकारियों के लिए सुविधाओं का स्तर एक जैसा होना चाहिए, ताकि किसी राज्य में रहने वाले रिटायर्ड जज को दूसरे राज्य की तुलना में असुविधा का सामना न करना पड़े।

केंद्र सरकार की ओर से बनाई जाने वाली कमेटी में इस बात पर विचार किया जाएगा कि रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, अन्य आवश्यक सेवाओं और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सहायता से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को रिटायर्ड न्यायाधीशों की सुविधाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। राष्ट्रीय नीति बनने से अलग-अलग राज्यों में मौजूद व्यवस्थाओं में सुधार और समानता आने की उम्मीद है। अब कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कमेटी के गठन और रिपोर्ट पेश होने के बाद यह साफ होगा कि रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के लिए सुविधाओं की नई राष्ट्रीय व्यवस्था किस तरह लागू की जाएगी।