लुधियाना के रखबाग पार्क में रविवार को उस समय माहौल चर्चा का विषय बन गया, जब सोशल मीडिया के लिए वीडियो बना रही एक मां और उसकी बेटी को निहंग सिंहों के एक जत्थे ने रोक लिया। दोनों पार्क के एक हिस्से में डांस करते हुए मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रही थीं। इसी दौरान वहां पहुंचे निहंगों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया और कहा कि सार्वजनिक पार्क लोगों के घूमने-फिरने, परिवार के साथ समय बिताने और शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए बनाए गए हैं, न कि डांस वीडियो या रील रिकॉर्ड करने के लिए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई, जिसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
बातचीत के दौरान निहंगों ने मां-बेटी से उनकी पहचान और वहां आने का उद्देश्य पूछा। महिला ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली हैं और हाल ही में पंजाब आई हैं। रविवार होने के कारण वे अपने रिश्तेदारों के साथ रखबाग घूमने पहुंची थीं। इसी दौरान बेटी ने सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए एक डांस वीडियो बनाने का प्रयास किया। निहंगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पार्क में इस तरह की गतिविधियां उचित नहीं हैं और इससे वहां मौजूद अन्य लोगों को असुविधा हो सकती है।
घटना के दौरान निहंगों ने बेटी के पहनावे पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे कपड़े पहनकर वीडियो बनाना सही संदेश नहीं देता। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर डाले जाने वाले वीडियो बड़ी संख्या में लोग देखते हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल होते हैं। इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा कोई भी कार्य नहीं होना चाहिए, जिससे समाज में गलत प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा हो। मां और बेटी ने अपनी ओर से सफाई देने की कोशिश की और कहा कि उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं था।
महिला और उसकी बेटी ने बातचीत के दौरान कई बार कहा कि वे केवल कुछ तस्वीरें और एक सामान्य वीडियो बना रही थीं तथा उनका किसी भी प्रकार की अशोभनीय गतिविधि का इरादा नहीं था। हालांकि निहंग सिंह इस बात से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने दोनों को समझाते हुए कहा कि पार्क में इस प्रकार की रिकॉर्डिंग नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग सार्वजनिक स्थानों का गलत उपयोग करेंगे तो इससे दूसरे लोगों को भी परेशानी होगी और पार्क का माहौल प्रभावित होगा।

स्थिति को शांत करने के लिए मां और बेटी ने निहंगों से कहा कि यदि उनकी वजह से किसी को आपत्ति हुई है तो वे आगे से ऐसी गलती नहीं करेंगी। बेटी ने हाथ जोड़कर भविष्य में पार्क के भीतर इस तरह का वीडियो न बनाने का आश्वासन दिया। इसके बाद निहंगों ने उनसे मोबाइल में रिकॉर्ड किया गया वीडियो हटाने के लिए कहा। दोनों ने उनके सामने ही अपने फोन से रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी। बताया गया कि निहंगों ने यह भी सुनिश्चित किया कि वीडियो हटाया जा चुका है और इसके बाद उन्हें वहां से जाने की अनुमति दे दी गई।
बातचीत के दौरान निहंगों ने सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि पार्कों में रोजाना बड़ी संख्या में परिवार, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घूमने आते हैं। ऐसे में वहां ऐसा कोई व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे दूसरे लोगों को असहज महसूस हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मनोरंजन के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का अलग तरीके से उपयोग करेगा तो इससे विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए सभी को नियमों और सामाजिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए।
निहंगों ने मां-बेटी को भविष्य के लिए चेतावनी भी दी कि आगे यदि पार्क में इस तरह की गतिविधियां दोबारा दिखाई दीं तो संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस को सूचना दी जा सकती है। उनका कहना था कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है और यदि कोई व्यक्ति बार-बार ऐसी गतिविधियां करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की जा सकती है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक झड़प या हिंसा की जानकारी सामने नहीं आई और मामला बातचीत के बाद वहीं समाप्त हो गया।
घटना के बाद इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखने की बात कही, जबकि कुछ ने यह सवाल भी उठाया कि किसी व्यक्ति को इस प्रकार रोकने और उसके निजी फोन की जांच करने का अधिकार किसके पास है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी-अपनी राय साझा की।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर सोशल मीडिया रील बनाने, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक मर्यादा और कानून के दायरे को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार मां-बेटी ने आगे से पार्क में इस तरह की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं करने का आश्वासन दिया और वहां से चली गईं। वहीं, निहंग जत्थे का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को परेशान करना नहीं बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखना और ऐसे कार्यों को रोकना है जिन्हें वे समाज और पार्क के वातावरण के लिए अनुचित मानते हैं।

