राजस्थान में पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा युवक गिरफ्तार: भारतीय सिम का OTP साझा करने के बाद ATS ने घर से उठाया

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राजस्थान के बीकानेर जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति को भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराने और उसे सक्रिय कराने के लिए वन टाइम पासवर्ड (OTP) साझा करने का आरोप है। यह कार्रवाई जयपुर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (ATS) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त जांच के बाद की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी युवक लंबे समय से सोशल मीडिया और मोबाइल संपर्क के जरिए पाकिस्तान स्थित संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था। मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मानते हुए एजेंसियां हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं।

गिरफ्तार युवक की पहचान बीकानेर जिले के बज्जू थाना क्षेत्र के गौड़ू गांव निवासी 22 वर्षीय अनिल कुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार अनिल का संपर्क शहजाद भट्टी गैंग से जुड़े एक व्यक्ति उज्जेर से हुआ था। बताया जा रहा है कि उज्जेर ने अनिल को भरोसे में लेकर उससे भारतीय सिम कार्ड हासिल किया और बाद में उसी सिम को पाकिस्तान में सक्रिय करने के लिए OTP मांगा। आरोप है कि 17 जुलाई को अनिल ने यह OTP साझा कर दिया, जिसके बाद सिम पाकिस्तान में एक्टिव हो गई। यही घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का मुख्य आधार बनी।

सूत्रों के अनुसार जैसे ही भारतीय सिम के पाकिस्तान में सक्रिय होने की तकनीकी जानकारी एजेंसियों तक पहुंची, ATS ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। 18 जुलाई को टीम आरोपी के गांव पहुंची और उसे घर से हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि उससे कई घंटों तक पूछताछ की गई, जिसमें मोबाइल संपर्क, सोशल मीडिया चैट, सिम खरीदने की प्रक्रिया और OTP साझा करने से जुड़े सवाल पूछे गए। पूछताछ के बाद ATS ने उसे स्थानीय पुलिस को सौंप दिया, जिसके बाद औपचारिक गिरफ्तारी की गई। फिलहाल आरोपी न्यायिक प्रक्रिया के तहत पुलिस जांच में शामिल है।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अनिल का परिवार गांव की एक ढाणी में रहता है और खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है। उसके पिता ने बताया कि 18 जुलाई को सादा कपड़ों में कुछ लोग घर पहुंचे थे और उन्होंने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया। उस समय अनिल खेत में काम कर रहा था। अधिकारियों ने उसे घर पर ही अलग ले जाकर लंबी पूछताछ की। परिवार का कहना है कि उन्हें शुरू में मामले की गंभीरता की जानकारी नहीं थी, लेकिन बाद में पता चला कि पूछताछ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक मामले में की जा रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि अनिल की पढ़ाई आठवीं कक्षा तक हुई थी और वह कुछ समय तक बीकानेर में एक सरकारी अस्पताल के आसपास चाय बेचने का काम करता था। बाद में वह रोजगार की तलाश में मुंबई चला गया, जहां वह लकड़ी के काम से जुड़ा हुआ था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मुंबई में रहने के दौरान उसका संपर्क किसी ऐसे व्यक्ति से हुआ, जिसने उसे धीरे-धीरे संदिग्ध नेटवर्क की ओर खींचा। एजेंसियां उसके पुराने मोबाइल नंबर, बैंक लेनदेन, सोशल मीडिया अकाउंट और संपर्कों की भी जांच कर रही हैं।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार जिस सिम कार्ड को सक्रिय कराया गया था, वह अब भी पाकिस्तान में उपयोग में होने की बात सामने आई है। यही कारण है कि जांच केवल OTP साझा करने तक सीमित नहीं रखी गई है। एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि सिम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, किन-किन नंबरों से संपर्क हुआ, क्या इंटरनेट सेवाएं उपयोग की गईं और क्या किसी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हुआ। तकनीकी टीम कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है ताकि सिम के उपयोग का पूरा नेटवर्क समझा जा सके।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने सिम खरीदने और उसके एक्टिवेशन की प्रक्रिया से जुड़ी कई जानकारियां साझा की हैं। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसकी पहचान पर और कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं तथा क्या उनमें से किसी का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में हुआ है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि ऐसे मामलों में कई बार युवाओं को छोटे आर्थिक लाभ, दोस्ती, सोशल मीडिया प्रभाव या झूठे वादों के जरिए फंसाया जाता है। इसी वजह से केवल एक व्यक्ति की भूमिका नहीं, बल्कि संभावित स्थानीय नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

बज्जू थाना पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में यह संकेत मिले हैं कि उज्जेर नामक व्यक्ति ने ही अनिल से संपर्क स्थापित किया था। पुलिस के अनुसार आरोपी को धीरे-धीरे भरोसे में लेकर उससे सिम प्राप्त की गई और बाद में OTP हासिल किया गया। अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी भारतीय सिम का उपयोग पाकिस्तान में किया जाता है, तो उसका इस्तेमाल फर्जी पहचान, ऑनलाइन खातों के संचालन, संचार नेटवर्क बनाने या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

राजस्थान के पाकिस्तान सीमा से लगे जिलों में पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया आधारित संपर्कों पर विशेष नजर रख रही हैं। जांच में कई बार यह पाया गया है कि सीमा पार बैठे संदिग्ध लोग युवाओं से इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, फेसबुक और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क करते हैं। शुरुआत सामान्य बातचीत से होती है और बाद में उन्हें सिम, बैंक खाते, दस्तावेज या अन्य तकनीकी मदद उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर ऐसे नेटवर्क स्थानीय स्तर पर सहयोगी तलाशने की कोशिश करते हैं।

फिलहाल इस मामले की जांच कई स्तरों पर जारी है और सुरक्षा एजेंसियां आरोपी के डिजिटल व सामाजिक संपर्कों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या केवल एक सीमित भूमिका में इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना सिम कार्ड, OTP, पहचान दस्तावेज या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है, इसलिए डिजिटल सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है।