कुलगाम में आतंकियों की कायराना हरकत: नाम पूछकर छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों को बनाया निशाना, सुरक्षा बलों ने शुरू किया बड़ा ऑपरेशन

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दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की कोशिश की। आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों से पहले उनके नाम पूछे और फिर छत्तीसगढ़ से आए दो हिंदू मजदूरों को अलग करके गोली मार दी। इस हमले में दोनों मजदूरों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आतंकियों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला कुलगाम जिले के केलाम इलाके में हुआ, जो मुख्य क्षेत्र से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हमले के समय ईंट-भट्ठे पर कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे। आतंकियों ने कथित तौर पर पहचान पूछने के बाद दो मजदूरों को निशाना बनाया। स्थानीय लोगों ने बताया कि गोलीबारी की कई आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी दीपक रात्रे और भूपेंद्र के रूप में हुई है। दीपक की उम्र करीब 24 साल और भूपेंद्र की उम्र 28 साल बताई जा रही है। हमले के बाद दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने एक बार फिर घाटी में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

घटना की जानकारी मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी। आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमले को अंजाम देने वाले आतंकी किस रास्ते से आए और वारदात के बाद किस दिशा में भागे। इलाके में वाहनों की जांच भी तेज कर दी गई है।

जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच में कुछ आतंकियों की भूमिका पर शक है। सूत्रों के अनुसार, हमले में स्थानीय आतंकियों के साथ विदेशी आतंकियों के शामिल होने की आशंका भी जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क, उनकी गतिविधियों और मददगारों की जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। हालांकि, मामले में अभी तक कोई अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस आतंकी हमले की निंदा की है और मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को पहले से मिलने वाली सहायता राशि के अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से भी अतिरिक्त मदद दी जाएगी। सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अलग-अलग राज्यों से रोजगार के लिए आते हैं। ये मजदूर निर्माण कार्य, ईंट-भट्ठों, सड़क परियोजनाओं, कृषि, बागवानी और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कामों में योगदान देते हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से हर साल बड़ी संख्या में मजदूर घाटी पहुंचते हैं।

इस आतंकी हमले ने घाटी में आम नागरिकों और बाहरी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियां पहले भी ऐसे हमलों को रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाती रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही हमले में शामिल लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच कई घटनाएं सामने आई हैं। नियंत्रण रेखा के पास घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया गया है और कई आतंकी गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा बल लगातार आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करने और इलाके में शांति बनाए रखने के लिए ऑपरेशन चला रहे हैं।

कुलगाम की इस घटना को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। आतंकियों द्वारा आम नागरिकों को निशाना बनाना घाटी में डर का माहौल पैदा करने की कोशिश माना जा रहा है। फिलहाल सुरक्षाबलों का अभियान जारी है और पूरे मामले की जांच के बाद ही हमले की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों की जानकारी सामने आ सकेगी।