एमपी में पटवारियों को राहत: अब बिना प्रारंभिक जांच दर्ज नहीं होगी एफआईआर, कलेक्टरों को जारी हुए नए निर्देश

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मध्यप्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज होने वाली एफआईआर की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब किसी भी पटवारी के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज करने से पहले पूरे मामले की प्रारंभिक जांच कराई जाएगी। इस संबंध में राजस्व विभाग की ओर से प्रदेश के सभी कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी मामले में बिना तथ्यों की जांच किए कानूनी कार्रवाई न की जाए। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से निष्पक्षता बनी रहेगी और अनावश्यक विवादों से बचा जा सकेगा।

नए निर्देशों के अनुसार यदि किसी राजस्व प्रकरण में पटवारी द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रतिवेदन के आधार पर आपराधिक कार्रवाई की आवश्यकता महसूस होती है, तो सबसे पहले उस पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण किया जाएगा। जांच में उपलब्ध दस्तावेज, परिस्थितियां और संबंधित तथ्यों का मूल्यांकन किया जाएगा। केवल जांच में पर्याप्त आधार मिलने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे जल्दबाजी में होने वाली कार्रवाई पर रोक लगने की उम्मीद है।

सरकार का कहना है कि कई मामलों में पटवारी केवल राजस्व प्रक्रिया के तहत प्रारंभिक रिपोर्ट या प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है। अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम अधिकारी या न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और नियमों के आधार पर लिया जाता है। ऐसे में केवल प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के कारण सीधे एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं माना गया। इसी कारण नई व्यवस्था लागू करते हुए पहले तथ्यों की जांच को अनिवार्य किया गया है।

यह निर्णय ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेशभर के हजारों पटवारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में बिना जांच के एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को समाप्त करना भी शामिल था। लंबे समय से इस विषय को लेकर कर्मचारी संगठन सरकार के सामने अपनी बात रख रहे थे और विधिक संरक्षण की मांग कर रहे थे। अब सरकार ने इस मांग पर सकारात्मक कदम उठाते हुए नई प्रक्रिया लागू करने का फैसला किया है।

सूत्रों के अनुसार पटवारियों के प्रतिनिधियों ने हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक कर अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा था। बैठक में सेवा से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें बिना प्रारंभिक जांच के दर्ज होने वाले प्रकरणों को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की गई। इसके बाद सरकार ने संबंधित विभाग से विचार-विमर्श कर कलेक्टरों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने का निर्णय लिया।

नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की जाए। प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित मामले में वास्तव में किसी प्रकार की लापरवाही, त्रुटि या नियमों का उल्लंघन हुआ है अथवा नहीं। इससे बेवजह दर्ज होने वाले मामलों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

दूसरी ओर, इस फैसले के बावजूद पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल फिलहाल जारी है। आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उनकी अन्य लंबित मांगों पर भी सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए। उनका मानना है कि केवल एक मांग पूरी होने से समस्या का पूर्ण समाधान नहीं होगा और शेष मुद्दों पर भी सकारात्मक पहल आवश्यक है।

प्रदेश के लगभग 23 हजार पटवारी पिछले कुछ समय से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन की शुरुआत सामूहिक अवकाश से हुई थी, जिसके बाद विभिन्न स्तरों पर कार्यों का बहिष्कार किया गया। बाद में कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया। इस दौरान कई राजस्व कार्यों की गति भी प्रभावित हुई और आम लोगों को विभिन्न सेवाओं में देरी का सामना करना पड़ा।

सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है। उम्मीद की जा रही है कि शेष मांगों पर भी दोनों पक्ष आपसी सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। फिलहाल बिना प्रारंभिक जांच के सीधे एफआईआर दर्ज न करने के निर्देश को पटवारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक राहत माना जा रहा है, जबकि हड़ताल समाप्त होने को लेकर अंतिम निर्णय कर्मचारी संगठन की आगामी रणनीति पर निर्भर करेगा।