महिला आरक्षण पर राहुल गांधी का सरकार से सवाल: 2023 में कानून पास होने के बाद भी लागू क्यों नहीं हुआ, परिसीमन से जोड़ने पर उठाए सवाल

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राहुल गांधी ने महिला आरक्षण कानून को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला कानून वर्ष 2023 में ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका था और कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया था। इसके बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।

राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से पूछा कि महिला आरक्षण कानून को लागू करने में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस कानून को परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में पारित कानून को बिना किसी शर्त के लागू किया जाना चाहिए।

महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से विपक्ष की राजनीति में प्रमुख रहा है। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उनके लिए तय आरक्षण का लाभ जल्द दिया जाए। वहीं, सरकार की ओर से इसे परिसीमन की प्रक्रिया के बाद लागू करने की बात कही जा रही है।

राहुल गांधी ने इससे पहले भारतीय महिलाओं के अधिकार और उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति को लेकर भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि देश की महिलाओं को अपने विचार व्यक्त करने और अपनी कल्पनाओं को सामने रखने की पूरी आजादी होनी चाहिए। उनके मुताबिक, कोई भी देश तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता, जब तक वहां की महिलाएं अपनी बात खुलकर नहीं रख पातीं।

इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि यह महिलाओं को लेकर एक सकारात्मक संदेश लगता है और उम्मीद जताई कि कांग्रेस महिला आरक्षण कानून का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। इसके बाद महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया।

महिला आरक्षण से जुड़ा नारी शक्ति वंदन अधिनियम वर्ष 2023 में संसद से पारित हुआ था। इस कानून का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई यानी 33% सीटें आरक्षित करना है। कानून बनने के बावजूद महिलाओं को यह आरक्षण तुरंत प्रभाव से नहीं मिलना है।

कानून में प्रावधान किया गया है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए पहले जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसी वजह से कानून पारित होने के बाद भी संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण तत्काल लागू नहीं हो सका है।

मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, वर्ष 2027 की जनगणना और उसके आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता तैयार होगा। इसके लिए सरकार की ओर से संबंधित संवैधानिक और कानूनी बदलाव किए जाने की बात कही जा रही है।

परिसीमन की प्रक्रिया के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 किए जाने की योजना भी चर्चा में है। सीटों की संख्या बढ़ने के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किए जाने का प्रावधान है।

अब मुख्य सवाल यही है कि महिला आरक्षण कानून को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़कर लागू किया जाए या इसे पहले ही लागू करने का कोई रास्ता निकाला जाए। राहुल गांधी ने सरकार से इसी मुद्दे पर स्पष्टता मांगते हुए कहा है कि वर्ष 2023 में पारित कानून को लागू करने में और देरी नहीं होनी चाहिए।