पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले जमकर बवाल देखने को मिल रहा है. पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने का मामला सामने आया था. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश की ममता सरकार को जमकर फटकार लगाई है. इसके साथ ही राज्य के मौजूदा हालात पर चिंता भी जाहिर की है.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह की घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है. इसका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चल रही चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है. कोर्ट ने कहा कि क्या हमें पता नहीं है कि उपद्रवी घटना के पीछे कौन है. यह साफ तौर पर एक सोची-समझी साजिश ही है.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि हमें सब पता है कि कौन ये हिंसा कराता है. उन्होंने कहा कि मुझे कल रात सख्त आदेश जारी करना पड़ा, तभी प्रशासन हरकत में आया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने की. इस दौरान उन्होंने कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था ढह चुकी है. बेंच ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से उनकी निष्क्रियता पर जवाब भी मांगा है.
चीफ जस्टिस ने कहा कि मुझे कल रात सख्त आदेश जारी करना पड़ा, तभी प्रशासन हरकत में आया. क्योंकि घेराव किए गए न्यायिक अधिकारी का 5 साल का बच्चा भी घर में ही मौजूद था. इसके बाद भी इस तरह की घटना सामने आई है.