लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में केंद्र सरकार की पहल अब अगले चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े प्रस्ताव पर विचार कर रही संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) वर्ष 2029 तक इस व्यवस्था को लागू करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने बताया कि अब तक विभिन्न राज्यों, संस्थाओं, विशेषज्ञों और नागरिकों से प्राप्त सुझावों में अधिकांश लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। समिति लगातार अलग-अलग राज्यों में जाकर सरकारों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित पक्षों से राय जुटा रही है ताकि अंतिम रिपोर्ट व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर तैयार की जा सके।
हाल ही में समिति ने गोवा में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्यों और अन्य विशेषज्ञों के साथ बैठक कर इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की। समिति के सदस्य एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर केवल बड़े राज्यों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छोटे राज्यों पर भी प्रशासनिक, आर्थिक और विकास कार्यों के स्तर पर इसका प्रभाव पड़ता है। उनका कहना था कि यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो शासन व्यवस्था अधिक सुचारु हो सकती है और चुनावी प्रक्रिया में लगने वाले संसाधनों की भी बचत होगी।
समिति का अगला दौरा लखनऊ में प्रस्तावित है, जहां मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। इन बैठकों से प्राप्त सुझावों को अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। समिति का उद्देश्य सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखते हुए ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसे संवैधानिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर लागू किया जा सके।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक ही समय पर आयोजित करना है, ताकि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों से प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों और चुनावी खर्च में कमी लाई जा सके। वर्तमान व्यवस्था में देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होने के कारण चुनाव आचार संहिता बार-बार लागू होती है, जिससे कई सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की बात कही जाती है।
इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान के कई प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है। इसके तहत संसद से आवश्यक बहुमत के साथ संशोधन पारित होने के अलावा कई मामलों में राज्यों की सहमति भी जरूरी होगी। यदि किसी राज्य का विधानसभा कार्यकाल साझा चुनावी चक्र से अलग होता है तो उसे नए चुनावी कार्यक्रम के अनुरूप समायोजित करने के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था की जा सकती है। वहीं यदि किसी सरकार का कार्यकाल निर्धारित समय से पहले समाप्त हो जाता है, तो प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार केवल शेष अवधि के लिए ही चुनाव कराए जाने का विकल्प भी विचाराधीन है, ताकि राष्ट्रीय चुनावी चक्र प्रभावित न हो।
समिति के स्तर पर चरणबद्ध तरीके से इस व्यवस्था को लागू करने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इस मॉडल के तहत पहले चरण में लोकसभा चुनाव के साथ उन राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं जिनका कार्यकाल उस समय समाप्त हो रहा होगा, जबकि शेष राज्यों को बाद के चरण में साझा चुनावी चक्र से जोड़ा जा सकता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी राज्यों को एक साथ चुनावी प्रणाली में लाना है, बिना किसी बड़े प्रशासनिक व्यवधान के।
संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न राज्यों, संवैधानिक विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार सुझाव प्राप्त कर रही है। इन सुझावों के आधार पर समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें कानूनी, प्रशासनिक और चुनावी व्यवस्था से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किए जाने की संभावना है। यदि आवश्यक संवैधानिक प्रक्रियाएं और राजनीतिक सहमति समय पर पूरी हो जाती हैं, तो वर्ष 2029 से देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ व्यवस्था लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

