पंजाब में 7 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी और पेंशनर अपनी 8 मांगों को लेकर आज महाहड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की हड़ताल का असर सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में दिखाई दे रहा है। कई जगह कर्मचारियों ने सामूहिक छुट्टी लेकर पूरे दिन काम नहीं करने का फैसला किया है।
हड़ताल के कारण कई सरकारी संस्थानों में कामकाज प्रभावित हुआ है। अस्पतालों में OPD सेवाएं बंद रहने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ जगह इलाज और दवाई के लिए पहुंचे लोगों को वापस लौटना पड़ा और उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा गया।
कर्मचारियों की महाहड़ताल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों के बीच बैठक भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती।
मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार कर्मचारियों से जुड़े हर मुद्दे का समाधान निकालने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब कर्मचारी अपनी हड़ताल खत्म करेंगे। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच अब इसी मुद्दे पर बातचीत अहम मानी जा रही है।
हड़ताल का असर प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ा है। अधिकारियों की गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवर भी हड़ताल में शामिल हैं, जिसके चलते कुछ अधिकारियों को दफ्तर पहुंचने में परेशानी हुई। कई सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी मौजूद नहीं रहे और कामकाज प्रभावित रहा।
पंजाब के अलग-अलग शहरों में कर्मचारियों ने प्रदर्शन और धरना दिया। कई सरकारी कार्यालयों के बाहर नारेबाजी की गई। कुछ स्थानों पर नगर निगम कार्यालय और अन्य सरकारी संस्थानों में ताले लगे दिखाई दिए, जबकि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर विरोध जताते रहे।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी हड़ताल का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं है। संगठनों के मुताबिक बाजार, दुकानें और निजी संस्थान सामान्य रूप से खुले रहेंगे और किसी तरह का चक्का जाम नहीं किया जाएगा। सरकारी कर्मचारी केवल अपने विभागों में काम से दूर रहकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि हड़ताल में अलग-अलग विभागों के कर्मचारी और कई यूनियनें शामिल हैं। कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रखने पर विचार किया जाएगा।
वहीं सरकारी बसों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई है। पहले पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC के ड्राइवर-कंडक्टरों के हड़ताल में शामिल होने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने हड़ताल में शामिल नहीं होने का फैसला किया। इसके चलते सरकारी बस सेवाएं चलती रहीं।
सरकार की ओर से भी कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर बातचीत की मेज पर आने की अपील की गई है। अब सभी की नजर कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच होने वाली बैठक पर है। अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो हड़ताल खत्म होने की संभावना है, जबकि बातचीत विफल रहने पर आंदोलन आगे बढ़ सकता है।

